अंधेरी रात मे देखा

 
 

अंधेरी रात को बंद कमरे में हाथ में अपनी बी ए क्लास की टीयूशान की नोट बुक पकड़े हुए मैं बेड पे बैठी हुई थी. मेरे दिल में एक ड्ऱ लगा हुआ था की पता नही कल टेस्ट में क्या पूछा जाएगा, मुझसे हो पाएगा के नही. तभी खामोशी को ख़त्म कराती हुई घर के बाहर साथ के खाली प्लॉट में मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी. मैने जब हल्के-हल्के पैरों से जाकर अपनी खिड़की से झाँक देखा तो मुझे एक अजीब नज़ारा नज़र आया.

मेरे मोहल्ले के लड़का-लड़की उस प्लॉट के एक कोने में जहाँ रोशनी नही के बराबर थी वहाँ एक-दूसरे से लिपटे हुए थे. लड़के ने लड़की को अछी तरह बाहों में जकड़ा हुआ था और दोनो के होंठ एक दूसरे से चिपके हुए थे. वो रमण और शीतल थे. थोड़ी देर वो एक दूसरे के होंठो को चूस्ते और फिर चोर देते और फिर चुसते और फिर चोर देते. साथ साथ रमण शीतल के स्टअंन, थाइस और उसकी कमर के नीचे आची तरह हाथ फीर रा था. मुझे यह जब नज़ारा बस चाँद की रोशनी और स्ट्रीट लाइट्स की वहाँ तक पहुँचती लाइट से देखने का मौका मिल रा था. मैने 21 साल की उमर

में ऐसा पहले कभी नही देखा था इसी लिए इस मौके को छोड़ने की मैं ग़लती नही कर सकती थी. मैं बस आश्चर्य से टकटकी निगाहो से उन दोनो को देखती रही. शीतल ने सलवार-कमीज़ पहनी थी और रमण ने शर्ट और जीन्स. जब उनका मॅन चूमने से भर गया तो रमण ने अपनी पेंट की ज़िप खोली और शीतल नीचे जुक गयी. फिर रमण ने अपनी अंडरवियर थोड़ी नीचे की और अपना सब्से प्राइवेट पार्ट उस लड़की के सामने बिल्कुल नंगा कर दिया. शीतल ने उसे थोड़ी देर हाथों से सहलाया और फिर धीरे धीरे कुछ बोलते हुए अपना खूबसूरात होंठो से छूकर अपने मूह के अंदर ले लिया. जैसे ही

शीतल ने अंदर लिया तो रमण प्लॉट की दीवार का सहारा ले कर खड़ा हो गे और उसके मूह पर इसका माज़ा सॉफ दिखाई दे रा था. शीतल उसे अंदर-बाहर कराती रही और वो बस मुझे से आवाज़ें निकलता रा. यह जब देखकर मेरे अंदर एक अंजान सी तरंग दोड गयी. मैं उन दोनो के ऐसे प्यार को देखकर हक्की-बक्की रह गयी थी. किताब अभी भी मेरे हाथों में थी लकिन मुझे इसे बेड पड़ी रखने का ख्याल मन में आया ही नही. मेरी तो बस उन दोनो से नज़र हट नही रही थी. तभी रमण ने उसे रोका और शीतल हाथ से उसे उतनी देर तक हिलती रही जब तक रमण अपनी चरम सीमा पर नही पहुँचा.

रमण ने अपना जब रस ज़मीन पड़ी गिरा दिया और पेंट उपर उठाते हुए शीतल से फिर किस करने लगा. फिर उन्होने ने इधर उधर देखा और चुपके से वहाँ से निकल लिए. उनके आँखों से ओहज़ाल होते ही मैं वापिस अपने बेड पर आई और मुझे थोड़ी होश आई की मैं तो कल टेस्ट की तायारी कर रही थी. लकिन उन दोनो का वो दृश्या मेरे मन से निकल नही पा रा था. मैने कभी किसी लड़के की तरफ ऐसे नही देखा था. मेरी फॅमिली बहोत रिस्ट्रिक्टेड है और इसी लिए मुझे बहोत लिमिट्स में रहना पराता है. मैने तो आज तक जीन्स भी पहन के नही देखी थी. मेरे मॅन में दो विचारो की लरआई हो रही थी. एक वो जो मैं आज तक अपनाती आई थी और एक यह जो मुझे उस दुनिया से जानू करवा गया जो मैने कभी सोची ही नही थी.

मैं खड़ी हुई और अपने कमरे में घूमने लगी और तभी मेरी नज़ार सामने शीशे पर गयी. उसी वक़्त पता नही मुझे क्या हो गया मैने अपनी नाइटी उतारनी शुरू कर दी. अब मेरे शरीर पड़ी ब्रा और पेंटी के इलावा और कुछ नही था. मैने शीशे में देखा तो मुझे एक गुमनाम ख्याल आया की आज तू अपने जिस्म के हर अंग को अछी तरह देख. उस तरह से देख जैसे तूने पहले कभी नही देखा था. मैने आँखे बंद कर के बहोत ही धीमी चाल से चलते हुए अपनी 35-द ब्रा और पेंटी भी अपने शरीर से अलग कर दी.

अब मैं निर्वस्त्र अपने कमरे में खड़ी थी. मैने आँखें खोली और पहली बार उस नज़र से अपने अंगों को निहारा जैसे पहले मैने कभी नही देखा था. मैने अपने जवानी के जोश में भरे हुए गोल-गोल तने हुए दूध देखे. और नीचे नज़र पड़ी तो दिखाई दी भरे हुए दो थाइस के बीच मेरी सील बाँध टाइट चुत. फिर पीछे घुमा के जब देखा तो अपनी 28 की वेस्ट और चट्टान जैसी 38 साइज़ वाली भारी हुई मदमस्त गान्ड नज़र आई. “जब

कोई लड़का इससे खेलेंगा तो कितना माज़ा आएगा” ऐसा सोचते सोचते मुझे एक अलग सा माज़ा आया और इसके साथ ही मैने अपनी सोच को भी बदल दिया और आगे वाली ज़िंदगी के लिए लिमिट्स(हाधें) का नाम ही अपने मॅन से मिटा दिया. इस नयी सोच के साथ ही मैं नंगी अपने बेड पे सो गयी. अगले दिन कॉलेज ले लिए मैने मेरे पास जो भी सब्से टाइट सलवार-कमीज़ थी वो पहनी. कॉलेज पहुँचर मैने पहली बार आँख उठा के लड़को को देखा और ऐसे ही हम क्लास में पहुँच गये. मैने पूरा दिन जब लड़को को जमकर लाइन दी.लकिन अफ़सोस इसका कोई फ़ायदा नही हुआ. लगता था की

मुझे तो अपनी बदलाव का पता है, लकिन ये जब मुझे वोही पूरेाने विचारो वाली सोनम समाज रहे हैं. मेरा किसी भी पीरियड में ध्यान नही लगा उस दिन और कॉलेज ख़त्म होते ही अपनी एक फ़्रेंड के साथ बस में बैठ गयी. बस में बहोत भीड़ होने की वजह से बहोत मुश्किल हो रही थी. तभी मैने देखा की मेरी फ़्रेंड के पीछे एक अंकल खड़ा है और चुपके-चुपके अपना लंड उसकी गान्ड पे रगड़ रा है. मेरी फ़्रेंड को कुछ पता नही चल रा था. मैने अपनी फ्रेंड के पास गयी और उससे टीयूशान की कुछ बातें करणी लगी और बातोब बातों में उसकी जगह आ गयी.

उस अंकल को भी नही पता चला की मैने ये जानबूज के किया है. मैं उसका काम आसान करने के लिए बिल्कुल उसके सामने खड़ी हो गयी और अपनी फ़्रेंड से बातें करणी लगी. तभी मुझे गान्ड पे सख़्त चीज़ का अनुभव हुआ. मेरे मन में मुझे की तरंग उररी. फिर मुझे महसूस होने लगा की वो अपना लंड मेरी गान्ड के बीच रख रा है और हल्का हल्का रगड़ रा है. मेरी आँखों में माज़ा था और मैं अपनी फ़्रेंड से पता नही कैसे बातें कर रही थी.

लकिन यह एहसास भी तभी ख़त्म हो गया जब 10 मिनट बाद मेरा घर आ गया और मुझे उतारना पड़ा. लकिन कॉलेज की उदासी को इस अंकल ने मिटा दिया था. मैं घर गयी और फिर शाम को टीयूशान जाकर वापिस आकर रात का खाना खाया और अपने कमरे में चली गयी. मेरे एग्ज़ॅम शुरू होने वाले थे और तभी मेरे आंटी और अंकल को मेरे ताया जी की बेटी की शादी में जाना था. मैं अपने एग्ज़ॅम की वजह से नही जा सकी और घर में ही रही. मेरे पेरेंट्स ने कहा की तुम रात को ताला लगाकर अपनी किसी फ़्रेंड के घर में चले जाना क्यूंकी वहाँ सेफ रहेगी और अपने भैया से भी बची रहेगी. आक्च्युयली मेरे बड़े भैया बहोत

शराब पीते थे इसी लिए घर में से कोई भी उनको खाना देने के इलावा बुलाता नही था. मैं उनको कभी कभी बुला लिया कराती थी. वो सुबह बिल्कुल ठीक होते थे लकिन रात को बहोत शराब पीकर आते थे और उनसे बात करना भी मुश्किल होता था. जैसे ही आंटी-अंकल गये मुझे एक गंदा ख्याल आने लगा. मैने बहोत सोचा लकिन वो ख्याल बार बार आता रा. वो ख्याल था “भैया से सेक्स करना! मैं आख़िरकार हार गयी और जानबूज के घर पड़ी ही रही. रात को भैया आए और उन्होने बहोत शराब पे हुई थी और वो सीधा अपने कमरे में सो गये.

मेरे अंदर अजीब सा ड्ऱ भी था और अपनी प्यास बुजाने का जोश भी था. मैने अपने सारे कपड़े उतार दिए और सिर्फ़ एक अकेली नाइटी पहन ली. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रा था. मैं भैया के कमरे में गयी और दरवाज़े के पास पहुँच कर उनको आवाज़ लगाई की “खाना लाउ भैया”. 5-6 बार कहने पड़ी भी उन्होने नही सुना. तो मुज़मे बहोत हिम्मत आ गयी. मैं उनके पास गयी और बड़ी हवस बड़ी आखों से उनको देखा और वो प्लॉट वाला सीन याद किया. फिर मुझसे रहा ना गेया और मैने बड़ी जल्दी जल्दी उनकी पेंट खोल दी और थोड़ी नीचे कर दी.

फिर अंडरवियर को होल-होल नीचे कर दिया. म उनका नंगा लंड मेरे आँखों के सामने था. मुजशे एक पल भी रा ना गया और मैने सीधा उसे अपने मूह में ले लिया. जैसे ही मैने मूह मे लिया मुझे एक अजीब सी शांति का एहसास हुआ. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे अंदर जो आग लगी हुई थी वो अभी थोड़ी शांत हुई. जब थोड़ी देर तक भैया ने कुछ हरकत नही की तो मैं लंड को बड़े मुझे से चूसने लगी. मुझे बहोत माज़ा आ रा था और मेरा शारीर एक दम गरम हो चुका था. तभी एक दम भैया ने आँखें खोली और मैं ड्ऱ गयी. मैं बिल्कुल सहमी निगाहों से उनकी और देखने लगी.

भैया ने कुछ नही बोला और मुझे ज़ोरों से पकड़ा और अपनी तरफ खिच लिया और अपने सीने से लगा लिया. मुझे बहोत माज़ा आया. भैया की आँखें अब भी शराब के नशे से भारी हुई थी. भैया ने मेरी गर्दन को हाथों से पाकर अपने होठों को मेरे होंठो के बीच फसा दिया. मैने कभी शराब को हाथ तक नही लगाया था लकिन आज वो ही शराब मैं अपने भैया के जीभ से पे रही थी. भैया ने मुझे बहोत चूसा. मैं भी एक दम बहसर्ं हो गयी और भूल गयी हमारा रिश्ता क्या है. मैने भी उनके जीभ के उपर अपनी जीभ गिसाई और पूरा उसको अपने होंठो के बीच रखकर चूसा.

तभी भैया ने गाली देते हुए कहा की. चल बहनचोद नंगी हो जेया. तेरी चूत मारनी है. मैं अपने बड़े में भैया से गालैन सुनकर पता नही क्यूँ मुझे ले रही थी. भैया ने मुझे खुद नंगे कर दिया और मैने भैया की पेंट को पूरा नीचे कर दिया. फिर भैया ने अपनी बानयन उतार दी और मैं पूरे जोश में भैया के उपर चढ़ गयी. मेरे दूध भैया की शाती और मेरी चुत भैया के लंड पे गिस्स रही थी. मैने मेहूस किया अब भैया का लंड बिल्कुल तन कर तयार हो चुका था. भैया ने मेरे दूध को बहोत गोल गोल मसल रहे थे और

इनका दूध बड़ी मस्ती से पे रहे थे. ष्प्प्प्प्प्प.. चप्प्प्प.. हमचप्प.. ऐसी आवाज़ें आ रही थी..! भैया ने मेरे पूरे शारीर पड़ी जम कर हाथ फ़ीरा, मेरी गान्ड को भी गोल-गोल मसला ुआर चूतद्ड के शीद पर में बड़े मुझे से उंगली डाली जिसका मुझे बहोत आनंद आया. फिर मुझे अपने नीचे लिटा दिया. मैं फिर भैया के नीचे आ गयी. भैया ने मेरी चुत को खोला और हल्की सी उंगली डाली. मेरी तो जान पे बन आई. मैं चीख को बहोत ही मुश्किल से कंट्रोल कर पाई. फिर भैया ने अपने लंड और मेरी चुत पड़ी थूक लगाया और एक धक्के से अपना लंड मेरी चुत में फसा दिया.

मैं मॅर गईइई. ऐसी ही एक लंबी चीख निकली और मुझे लगा मेरी चुत फट गयी है. लेकिन मुझे बहोत तकलीफ़ हो रही थी. तभी भैया बहोत ज़ोर ज़ोर से अपना लंड अंदर बाहर करने लगे. 3-4 मिनट तो मुझे लगा की मैं मॅर जायूंगी. मुझे बहोत दर्द हो रा था लकिन जैसे ही मेरे मन में ख्याल आया की मैं चुद रही हूँ और वो भी अपने भैया से. मुझे दर्द के साथ माज़ा भी आने लगा. मैने भी भैया का साथ दिया और अपनी गान्ड को हिला हिला कर उनका लंड लिया.

मैने भैया के मूह मे में अपनी जीभ डाल दी और ँकी जीभ को चूसने लगी और भैया को कस्स के पाकर लिया. भैया भी बड़े कस्स कस्स के धक्के लगता गये और मैं बड़े मज़े से पूरा लंड अंदर तक लेती रही. फिर भैया ने मेरी टाँगें अपने शोल्डर पड़ी न्यू एअर और मेरी चुत छोड़ने लगे. मुझे फिर दर्द हुआ. भैया ने साथ ही मेरे दूध के निपल्स को चूसना शुरू कर दिया. अब मैं बिल्कुल मज़े में थी. तभी मेरा दर्द थोड़ी देर के लिए एकदम गायब हो गया और मैने चीख मार कर अपनी पानी निकाला

ह.. उईईइमाआआ. हइई मुझे ऐसा माज़ा आया की बता नही सकती. लकिन भैया मुझे छोड़ते गये. मैं भैया को कहने लेगी बाहर निकलना माल प्लज़्ज़्ज़…..लकिन भैया कुछ सुन ही नही रहे थे. फिर 5-6 मिनट और छोड़ने के बाद भैया ने अपने लंड से एक चीख के साथ पानी की धार छोड़ी और मैने उनसे च्छुतने की कोशिश की लकिन भैया ने मुझे गान्ड से कस्स के पकड़ा हुआ था. भैया ने अपना सारा माल मेरी चुत में ही खाली किया. मुझे भी उनका गरम गरम माल अपनी चुत के अंदर जब लगा तो एक अजब सा माअज़ेदार एहसास हुआ.

हम दोनो ही 5-6 मिनट तक ऐसे पड़े रहे. फिर जब मुझे होश आई तो मैं उठी और अपनी नाइटी पहनी. फिर मैने भैया को कपड़े पहनाए और अपने कमरे में चली गयी. मुझे बहोत दर्द हो रही थी इसी लिए सारी रात में अच्छे से सो नही पाई. सुबह जब मैने उठकर भैया के लिए चाय बनाई तो भैया उठे और मुझे अजीब सा देखा. मैं थोड़ा ड्ऱ गयी. तभी भैया ने

मुझसे पूछा सोनम तुम कल मेरे कमरे में आई थी?

मे: नही भैया मैं तो आज सुबह ही आई हूँ आपको चाय देने. क्यूँ क्या बात है?

भैया: नही कुछ नही. वैसे ही पूछा. आछा चाय रख दो.! पता नही भैया को याद है या नही लेकिन मुझे तो बहोत माज़ा आया, चाहे इस चुदाई का दर्द 2-3 दिन तक रा!

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