पुलिसवाले से चुदकर ही मैं अपने पति की जमानत करवा पाई

दोस्तों, मैं भारती आपको अपनी कहानी कामुक स्टोरी डॉट कॉम पर सुना रही हूँ. मेरा ३० साल की एक जवान औरत हूँ. देखने में बला की सुंदर हूँ. मेरे छातियाँ ३६ की है जब कमर ३० और चुतड ३२ के है. मैं देखने में बहुत ही हसीन औरत लडकी हूँ और जो भी मुझे मार्किट में एक बार देखता है वो पलट के जरुर देखता है. हर कोई मुझे और मेरी जवानी देखकर आहें भरना लगता है. जवान लडकों की क्या बात है, मुझे देखकर तो बुड्ढों के लंड खड़े हो जाते है. मैं हूँ ही इतनी झककास माल.

मेरे पति बस ड्राईवर है. दोस्तों २ महीने पहले एक बहुत ही बुरा हादसे हमलोगों के साथ हो गया. मेरे पति शराब पीकर बस चला रहे थे. आगरे के पास स्कुल के बच्चों की वैन उनकी बस के सामने से निकल रही थी. मेरे पति शराब के नशे में थे. उन्होंने स्कुल के बच्चों से भरी वैन को ठोक दिया जिसमे ३० से जादा बच्चे से. १२ बच्चे तो मौके पर ही खत्म हो गये और बाकी जख्मी हो गयी. भीड़ ने मेरे पति की बस रोक ली और उनको खूब मारा और पुलिस के हवाले कर लिया. थाने ने मेरे पास फोन आया की मेरे पति को गिरफ्तार कर लिया गया है. ये सुनते ही मेरी गांड फट गयी. मैं घर पर थी और यही सोच रही थी की रात में पति आकर मुझे पेलेंगे और चोदेंगे. पर फोन के आते ही मेरे सारे हसीन ख्वाब मिट्टी में मिल गये.

मैं उस वक्त नंगी थी. मैंने तुरंत ब्रा और पेंटी पहनी. अपनी चूत से अपनी ऊँगली निकाली और फटाफट साड़ी पहनकर थाने भाग गयी. देखा तो पुलिसवाले मेरे पति को उल्टा टांग कर लाठी बरसा रहे थे. ‘बता बहनचोद!! क्यों तू शराब पीकर बस चला रहा था??…बता बहनचोद!! पता है १२ बच्चे मौके पर ही खत्म हो गये!!..तुझे तो फांसी होगी…फांसी..’ पुलिसवाले कह रहे थे और गमागम लाठियां बरसा रहे थे. मेरे पति का बदन पर लाठियों ही लाठियों के निशान थे. ये सब देखकर मेरी माँ चुद गयी और गांड फट गयी.

‘साब…भगवान के लिए इनको छोड़ दीजिये…प्लीस सर!! इनकी जमानत कर दीजिये!!’ मैंने पुलिसवाले से हाथ जोडकर कहा. थानेदार कोई ठाकुर था. देखने में वो किसी डाकू की तरह डरावना लगता था. मैंने बिलकुल नही सफ़ेद रंग की साड़ी पहन रखी थी. मेरे झीने और बहुत हलके पल्लू से मेरे ब्लाउस के अंदर की ३६ साइज़ की छातियाँ दिख रही थी. क्यूंकि ब्लाउस का कपड़ा भी बेहद हल्का था. थानेदार मुझे और मेरे सीने के घूर के देखने लगा.

‘इस बहनचोद को तो फासी लगेगी बहनजी …फांसी.. १२ बच्चे मर चुके है और १८ बच्चे अभी भी जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहे है. इसकी जमानत तो भगवान भी नही करा सकता!!’ थानेदार बोला. मैंने दौड़ के उनके पैर पकड़ लिए. ‘साब आप ३०२ का चार्ज मत लगाइए. गैर इरादतन हत्या का चार्ज लगा दीजिये, आप जो भी कहेंगे मैं करुँगी. आपको जितने पैसे चाहिए होंगे मैं दुंगी!!’ मैंने कहा. थानेदार मुझे बड़ी देर तक घूरता रहा. फिर वो मेरे पल्लू के अंदर मेरे बड़े बड़े आमों को ताड़ने लगा. मुझे अंदर कमरे में ले गया ‘ठीक है ५ लाख रुपए और तेरी चूत!!’ मंजूर है तो बता??? मैं ३०२ का चार्ज नही लगाऊंगा और गैर इरादतन हत्या का चार्ज लगा दूंगा जिससे तेरे पति को जमानत मिल जाएगी!!’ वो थानेदार मेरे मम्मो को घूरता हुआ बोला.

‘मंजूर है साब!!’ मैंने कहा

‘शाम को इस पते पर कैश में पैसे लेकर आ जाना. और जरा सजकर आना. तेरी चूत कसके मारूंगा!!’ पुलिसवाला बोला.

दोस्तों मैंने तुरंत बैंक गयी और ५ लाख रूपए निकाले. फिर घर आकर तुरंत बाथरूम में घुस गयी और अच्छी तरह से अपने झांटे और बगलों के बाल मैंने शेविंग मशीन से अच्छी तरह से साफ़ कर दिए. जिससे जब थानेदार मुझे चोदे तो उसे पूरा पूरा मजा मिले. कहीं ऐसा ना हो की उसे मजा ना मिले और वो अपना इरादा बदल दे. फिर झाटें बनाकर मैंने अच्छी तरह से अपनी चूत पर कई तरह के लोशन लगाये. जिससे मेरी चूत और नर्म और मुलायम हो गयी और चांदी की तरह चमकने लगी. फिर दोस्तों मैंने महंगे साबुनों से खूब मल मलकर नहा लिया. जब मैंने एक नई साड़ी पहनी और पूरा मेकअप किया तो मैं किसी कुवारी लडकी जैसी लग रही थी. फिर मैं ऑटो करके थानेदार के घर पर पहुच गयी. मुझे देखकर वो बहुत खुश हो गया. रुपयों से भरा बंडल मैंने उसको दिया ‘सर! गिन लीजिये!!’ मुझे देखकर वो खुश हो गया.

‘अरे भारती जी !! आप तो बड़ी गजब की माल लग रही है!! आपको चोदने में बड़ा मजा आएगा!! आइये जरा अपने हाथो से मेरे लिए जाम बनाइये!!’ थानेदार बोला. मैंने उसके पास सोफे पर बैठ गयी. वहां ऐ सी चल रही थी. बहुत ठंडा ठंडा लग रहा था. बड़ा सुकून मिल रहा था. मैं थानेदार के लिए शराब की बोतल से जाम बनाने लगी. फिर उसने कुछ आइस क्यूब डाल दिए. थानेदार मेरी साड़ी के उपर से ही मेरे चूतड़ों को सहलाकर मेरी गांड का साइज़ लेने लगा.

‘लीजिये सर!! आपका जाम तैयार है !!’ मैंने कहा

‘ऐसे ही भारती जी!! जरा मुझे अपने हाथो से पिलाइए तब ही मेरा मन आपको चोदने को करेगा और तब ही मेरा लंड खड़ा होगा!!’ थानेदार बोला. दोस्तों तब मुझे ना चाहते हुए भी उसे अपने हाथों से जाम पिलाना पड़ा. थानेदार ने आधा जाम पिया और आधा मेरे मस्त मस्त होंठो पर लगाकर पिला दिया. फिर वो मेरे होठ पीने लगे. आइस क्यूब और शराब से मेरे होठ गीले हो गये थे और ठन्डे हो गये थे. वो कपटी और भ्रष्ट थानेदार मेरे ठन्डे ठन्डे शराब से भीगे होठों को मजे से पीने लगा. कुछ देर में मुझे भी मौज आने लगी. मैं भी मुँह चला चलाकर उनको अपने मस्त होठ पिलाने लगी.

‘सर!! मैं आपसे चुदवाने जा रही हूँ और आपका नाम तक नही जानती हूँ!! इसलिए प्लीस अपना नाम तो बताइये??’ मैंने कहा. थानेदार मुस्कुरा दिया.

‘धर्मवीर सिंह !!!’ वो बोला और फीर से मेरे होठ पीने लगा. अब कम से कम मैं उसका नाम तो जानती थी. औरत जिससे चुद्वाए उसका नाम जानना जरुरी होता है..

थानेदार धर्मवीर सिंह से मेरा पल्लू हटाया तो मेरे बेहद हल्के ब्लाउस के कपड़े से मेरे बड़े बड़े भारी भारी मम्मे दिखने लगे. इतना ही नही, मेरी कड़ी कड़ी निपल्स उठी उठी दिखने लगी. थानेदार ने अपनी शर्ट निकाल दी. उपर से बिना कपड़ों के हो गया. मेरे ब्लाउस के उपर से ही मेरे दूध दबाने लगा. ‘रुक जाइए सर!….आधा अधुरा क्यूँ?? पूरा मजा लीजिये!!’ मैंने कहा. मैंने खुद अपने ब्लाउस के बटन खोल दिए. ब्लाउस निकाल दिया. थानेदार मुझे पकड़ने लपके.. मुझे कसी और चुस्त ब्रा भी नही निकालने दी. मैंने उनको हाथ से एक सेकंड रुकने का इशारा किया. और जल्दी से ब्रा निकाल दी. थानेदार मुझे देखकर चुदासे हो गये. मेरी बड़ी बड़ी ३६ छातियों को देखकर तो बहनचोद के मुँह में पानी भर आया. मैं जल्दी से ब्रा हटाकर दूर फेंक दी. वरना वो मेरी ब्रा ही फाड़ डालते. थानेदार मेरे मम्मो को मुँह में भरके किसी बच्चे की तरह पीने लगे. उनको शराब का नशा पूरी तरह चढ़ चूका था. मुझे रंडी , छिनाल ….आवारा ना जाने क्या क्या माँ बहन की गालियाँ बकने लगे. पर कैसे भी मुझे उसने चुदवाना था और अपने पति को छुडवाना था. इसलिए मैं उनकी हर एक गाली सुनती रही और अपने दूध को चुसवाती रही. वो किसी पागल की तरह हपर हपर करके मेरे दूध और उनकी निपल्स जोर जोर से चबाने लगे. मुझे बहुत मजा आ रहा था. क्यूंकि मेरा आदमी कभी इस तरह से मेरे दूध काट काट कर नही चबाता था. मैं भी मजे से थानेदार को अपना दूध पिलाती रही. फिर उन्होंने मेरी साड़ी निकाल दी. मेरा पेटीकोट का नारा खोल दिया. मैं नंगी हो गयी. मेरा पेटीकोट उतार दिया.

फिर थानेदार ने मेरी चड्ढी निकाल दी. उन्होंने मुझे सोफे पर सीधा लिटा दिया और मेरी चूत बड़ी देर तक सूंघते रहे. मेरी चिकनी चमेली जैसी चूत से बहुत सोंधी सोंधी खुसबू आ रही थी. थानेदार बड़ी देर तक मेरी चूत सूंघते रहे.

‘भारती जी !! मैंने हजारों गुनहगारों की बीबियों को चोदा है पर आप चूत की खुसबू सबसे जादा निराली है!!’ थानेदार बोला. मैंने उसे शुक्रिया कहा. फिर वो झुककर मेरी चूत पीने लगा. मैंने किसी कुतिया की तरह अपने दोनों पैर खोल दिए और उपर उठा लिए. जिससे थानेदार अच्छी तरह से मेरी पूरी चूत में निचे से उपर तक जुबान फेर सके. थानेदार मस्ती से मेरी चूत पीने लगा. मुझे बहुत आनंद आने लगा. मेरा पति जो इस समय जेल में बंद था वो भी ठीक इसी तरह मेरी चूत पीता था. थानेदार जोर जोर से हपर हपर करके मेरा लाल खरबूजे सा भोसड़ा पीने लगा. मेरी चूत की एक एक कली को वो मस्ती से पी रहा था. मेरे चूत के दाने पर वो अच्छे से जुबान फेर रहा था. मेरी क्लिटोरिस पर भी वो मस्ती से जीभ चला रहा था. थानेदार मुझे एक असली चुदककड लग रहा था.

फिर वो मेरी भरी भरी जाँघों को चूमने लगे और हाथ से सहलाने लगा. मैं अपने हाथो से अपनी छातियों की कड़ी कड़ी निपल्स को हाथ से ऐठने लगी. इससे मेरी निपल्स और भी जादा कड़क हो गयी. और उपर की ओर खड़ी हो गयी. थानेदार जोर जोर से चपड़ चपड़ करके मेरी चूत पीने लगा और सुडकने लगा. मुझे बहुत अच्छा लगा. क्यूंकि मेरे पति सिर्फ मेरी चूत पीते थे. कभी चाय की तरह सुड़कते नही थे. मैंने दोनों पैर बिलकुल उपर कर लिए थे. मेरी टांगें मेरे मुँह तक पहुच रही थी.

देखने से मैं कोई पेशेवर छिनाल लग रही थी. जैसी कोई बेहया आवारा रंडी चुदवाने जा रही हो. थानेदार अभी भी मेरी रसीली चूत सुड़क रहा था. तभी मेरी चूत को हलचल होने लगी और मेरा सफ़ेद चिपचिपा मक्कन मेरे भोसड़े से निकलने लगा. थानेदार ने मेरी चूत का सारा बेशकीमती माल पी लिया. इससे मुझे और भी जादा सुख मिला. फिर थानेदार ने किसी सीपी की तरह मेरे चूत की कलियाँ खोल दी. अंदर मेरी बेशकीमती चूत हिलोरे मार रही थी. थानेदार ने मेरी गुलाबी सोने की चूत को अपने पवित्र होठों से लगा लिया और चूत पीने लगा. मुझे बहुत अच्छा लग. कितने ही लोगों से मुझे चोदा था. पर कम लोगो से मेरी चूत पीने में इतना इंटरेस्ट दिखाया था. थानेदार महा चुदक्कड़ आदमी निकला. वो तो बिलकुल रसिया निकला. उनसे अपनी वर्दी वाली पैंट निकाल दी और निकर भी निकाल दिया.

मेरी चूत में ऊँगली दे देकर पीने लगा जिससे कुछ कुछ देर में मेरी चूत से कीमती माल निकलने लगा. मुझे बहुत सुख मिला दोस्तों. मैं आपको बता नही सकती हूँ मुझे कितनी मौज आई. थानेदार जोर जोर से मेरी चूत में उनली करने लगा. कुछ कुछ देर में रह रह कर मेरा माल निकलने लगा. फिर उसने अपनी रिवोल्वर की लम्बी नाल मेरी चूत में पेल दी और नाल से मेरी चूत मथने लगा. मेरी गांड फट गयी की कहीं गलती से गोली चल गयी तो मेरी चूत हमेशा के लिए फट जाएगी और फिर कभी मैं किसी दुसरे मर्द का लौड़ा नही खा पाऊँगी और ना ही किसी से चुदवा पाऊँगी. मैं डर के मारे थर थर करके कांपने लगी.

‘अरे भारती जी!! घबराने की जरुरत नही है. रिवोल्वर में सेफ्टी लोक लगा है. गोली नही चलेगी!!’ थानेदार बोला.  फिर उसने मेरी पतली हालत देखते हुए मेरी चूत से नाल निकाल ली. फिर उसने अपना मोटा सा लंड मेरी चूत में डाल दिया और मुझे चोदने लगा.  उसका लंड किसी घोड़े के लंड से कम नही था. वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा. मुझे बड़ा मजा मिलने लगा. क्यूंकि मेरे पति का लौड़ा इससे पतला और छोटा था. वो मुझे जोर जोर से गचागच चोदने लगा. मेरी चूत खिसककर दोनों किनारे की तरह भाग गयी जब थानेदार ने लंड डाला. फिर वो मुझे चोदने लगा. मैंने कभी मुँह खोलकर आहे भरती, गर्म गर्म सासें छोड़ती, कभी मैं आँखे और मुँह बंद कर लेती. मैं मस्ती से चुदवा रही थी. थानेदार के लौड़े ने मेरी चूत का एक एक इंच कवर कर लिया जिससे मुझे बहुत जादा कसावट मिलने लगी.

चुदवाते समय मुझे अपनी जवानी के दिन याद आ गए जब मैं नई नई जवान हुई थी और इधर उधर आवारा लडकों से चुदवाती रहती थी. आज मुझे वही दिन फिर से याद आने लगा. थानेदार ने मेरी दोनों टांगो को और जादा उपर उठा दिया जिससे मेरी पैर मेरे मुँह से लगने लगे. ऐसा करने से मेरी चूत खुलकर कुप्पा हो गयी और थानेदार के सामने आ गयी. वो जोर जोर से हचा हच मुझे चोदने लगा. फिर कुछ देर बाद उनसे अपना गर्म गर्म पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया.  मुझे बहुत मजा मिला दोस्तों. फिर वो मुझे अंदर कमरे में ले गया. जहाँ हम दोनों ने शराब की एक पूरी बोतल खाली कर दी. मुझे भी खूब चढ़ गयी. मैं उस गैर मर्द के सामने बिलकुल नंगी थी. मेरे जिस्म पर एक रुमाल तक नही था.

मैं किसी आवारा चुदासी कुतिया जैसी लग रही थी. थानेदार ने मुझे अपने लौड़े पर कमर पर बिठा लिया. और उचका उचकाकर मुझे चोदने लगा. मैं भी अपनी तरह से उसके लंड पर कूदने लगी. जिससे हम दोनों को चुदवाने में जादा से जादा मजा मिले. मेरे दोनों स्तन हवा में उछलने लगे. थानेदार एक बहुत ही माहिर चुदैया निकला. उसने मुझे घंटेभर चोदा पर शराब के नशे के कारण वो अभी भी नही झडा. ऐसे में मेरी जिम्मेदारी बढ़ गयी. मैंने उसके दोनों कंधे पकड़ लिया और उसके सीने पर झुक गयी. और खूब जोर जोर से बैठकर चुदवाने लगी. इससे मेरी चूत में थानेदार का लौड़ा बड़ी गहराई तक जाने लगा. मुझे और उसको दोनों को मजा मिलने लगा. उसने मेरे पुट्ठे पकड़ लिए और जोर जोर से चांटे मारने लगा. इससे मुझे बहुत जादा मजा मिलने लगा. मैं उचक उचककर चुदवाने लगी. मेरी चूत में बड़ी नशीली रगड़ होने लगी और चुदवाने में जादा मजा मिलने लगा.

फिर वो बड़ी जोर जोर से मुझे चोदने लगा. अचानक मैं चुदवाते चुदवाते ही झड गयी. पर थानेदार नही झडा. वो पहले की तरह ही मुझे ठोकता रहा. मुझे इतनी जादा सनसनी हुई की मैं बता नही सकती. पुरे बदन में झुर्जुरी होने लगी. वो मुझे बिना रुके ठोकता ही रहा, पेलता बजाता ही रहा. फिर वो कुछ देर बाद जड़ गया. अभी भी उसकी चुदास शांत नही हुई. अब उसने मुझे पलट कर लौड़े पर बिठा लिया. थानेदार का लौड़ा एक मिनट में फिर से खड़ा हो गया. अब मेरी पीठ उसके मुँह की तरह थी. मैं उचक उचककर फिरसे चुदवाने लगी और डेढ़ घंटे बाद वो थानेदार झड गया.  सुबह उसने मेरे पति को जमानत दे दी. आपको ये कहानी कैसी लगी, अपनी कामेनट्स कामुक स्टोरी डॉट कॉम पर जरुर दे.

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