बिहार से सीखी लेस्बियन सेक्स करना

 
 

मेरा नाम कोमलप्रीत है. मैं मुंबई में एक फाइव स्टार होटल में काम करती हूँ. जुहू में पेइंग गेस्ट के तौर रहती हूँ. मेरी रूम पार्टनर है सबनम. हमारे घर के मालिक का खुद का बिजनेस है. वो बहुत ही काम उम्र के हैं. उनकी उम्र 37 साल और उनकी पत्नी माला की 34 साल है.

सबनम टी वी सीरियल में छोटे मोटे रोल करती है. हम दोनों बहुत अच्छी दोस्त बन चुकी हैं. सबनम बिहार की रहने वाली है. उसकी बड़ी बहन की शादी तय हो गई. उसने जिद की कि मैं बी उसके साथ चलूँ. मुझे उसकी जिद के आगे झुकना पडा. हम बिहार पहुँच गए.

सबनम का घर पुराने इलाके में था. भरा पूरा परिवार. करीब तीस लोग उस पुरानी कोठी में रहते थे. हमें एक छोटा कमरा मिला. वो कमरा सबनम की चचेरी बहन अमायरा का था. एक डबल बेड लगा था. अमायरा हमारी हमउम्र थी. देखने में खुबसूरत लेकिन बहुत ही शांत. हम तीनों रात को उसी पलंग पर सो गए.

सोते ही नींद आ गई. मुझे कुछ देर के बाद पलंग में हलचल होने का आभास हुआ. मैंने आँखें खोली. सबनम हम दोनों के बीच में सोई थी. मैंने देखा कि सबनम के कुर्ती के सारे बटन खुले हुए हैं और अमायरा सबनम के उभरे हुए स्तनों को लगातार चूम रही है. मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ. मैंने सबनम को कभी भी मेरे साथ ऐसा करते नहीं देखा था.

मैंने चुपचाप अमायरा और सबनम को देखने लगी. काफी देर तक यह सब चलता रहा. फिर मुझे नींद आ गई. सवेरे मैंने देखा अमायरा फिर से चुप और शांत नजर आ रही थी. सबनम से कुछ पूछने की हिम्मत नहीं हुई. दोपहर को मैं और सबनम युहीं बाज़ार घूमने चले गए.

रास्ते में मैंने सबनम को रात अमायरा वाली बात कही. सबनम थोडा चौंकी और फिर बोली ” वो ऐसी ही है. उसे यह सब करना काफी पहले से अच्छा लगता है. मैं भी उसे मना नहीं करती. मैं जानती हूँ कि कई लडकीयाँ इस कमजोरी की शिकार है. अमायरा एक लेस्बियन है. मुझे भी यह अच्छा लगता है इसलिए मैं मना नहीं करती. इससे उसकी इच्छा भी पूरी हो जाती है.

मैं कुछ ना बोली. मैंने आज तक लेस्बियन शब्द सुना था. उनके व्यवहार के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था. अमायरा के रूप में एक लेस्बियन मेरे सामने थी. शाम को मैं छत पर खड़ी थी. मैंने सबनम और अमायरा को अमायरा के कमरे की तरफ जाते देखा. उत्सुकतावश मैं उन दोनों के पीछे पीछे चली गई. मैं बाहर खिड़की से अन्दर देखने लगी.

सबनम दीवार के सहारे खड़ी हो गई. अमायरा उसे दीवार की तरफ अपने जिस्म से दबाते हुए खड़ी हो गई. अब अमायरा उसे गरदन के अलग अलग हिस्सों को चूमने लगी. सबनम मुस्कुराते हुए अमायरा के एक एक चुम्बन का मजा ले रही थी. फिर अमायरा ने अपनी कुर्ती उतार दी.

अब सबनम ने अमायरा के नंगे सीने को यहाँ वहां चूमना शुरू किया. दोनों केवल अपनी अपनी ब्रा में थी. आपस में लिपटी हुई. मैं उन दोनों को तब तक देखती रही जब तक दोनों अलग होकर अपने अपने कपडे डालकर कमरे के दरवाजे से बाहर निकल गई. मुझे ना जाने क्यूँ ऐसा लगा जैसे वे दोनों जो भी कुछ कर रही है उसमे बुरा कुछ भी नहीं है. उन्हें अच्छा लग रहा है और मजा भी आ रहा है. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

रात को एक बार फिर हम उसी तरह से सो गए. जब सबनम और अमायरा को नींद आ गई तो मैंने उन दोनों को थोडा सा दूर धकेला और उन दोनों के बीच सो गई. मुझे अब अमायरा के जागने का इंतज़ार था. कुछ ही देर के बाद अमायरा जाग गई. उसने मुझे सबनम समझा और मेरी कमीज के बटन खोलकर मेरे स्तनों को पहले सहलाना शुरू किया और फिर धीरे धीरे उन्हें चूमना शुरू किया.

मेरे साथ यह सब पहली बार हो रहा था. मुझे बहुत अच्छा लगने लगा. मैंने भी अमायरा के कुरते के बटन खोले और उसकी नंगी छाती तो जगह जगह पर चूमना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में हम दोनों एक दूसरे को लगातार चूमने लगे थे. तभी अमायरा को यह अहसास हो गया कि कुछ गड़बड़ है. उसने कमरे की छोटी खिड़की का दरवाजा खोल दिया. हलकी सी रौशनी अन्दर आने लगी.

हम दोनों ने एक दूसरे का चेहरा देख लिया. पहले तो अमायरा घबराई लेकिन मैंने उसे अपने से लिपटा लिया. अमायरा ने कोई प्रतिरोध नहीं किया. हम दोनों की इस हलचल से सबनम की आँख खुल गई. उसने जब हम दोनों को इस हालत में देखा तो उसने मुझे कानों में कहा ” मुझे तो कुछ और कह रही थी और अब खुद भी….

” मैंने सबनम से कहा ” जब तुम दोनों को इस तरह से देखा तो मुझे लगा कि तुम कुछ गलत नहीं कर रही हो.” सबनम भी अब हमारे साथ शामिल हो गई.

अब सवेरे हम तीनों एकांत का इंतज़ार करने लगी. अगले दिन ही शादी थी. दोपहर में खाने के बाद निचली मंजिल के खुले चौक में घर के सभी लोग एकत्र हो गए और नाच गाना शुरू हो गया. हम तीनों भी उसमे शामिल हो गई. इसके बाद आस-पड़ोस की औरतें भी शामिल हो गई. हमने मौके का फ़ायदा उठाया और अमायरा के कमरे में आ गई. हमने कमरे के बाहर एक ताला लगा दिया और फिर छोटी वाली खिड़की से कमरे के भीतर आ गई.

अब हर कोई यही समझता कि कमरे पर ताला है इसलिए इसमें कोई नहीं है. हम तीनों ने अपने कपडे उतारे. केवल ब्रा और पैंटी रहने दी. अब हम तीनों आपस में लिपट लिपटकर चूमा-चाटी करने लगे. तीनों को जबरदस्त मजा आने लगा था. अचानक मेरा हाथ अमायरा कि पैंटी को छु गया. अमायरा तड़पकर रह गई.

मैंने अपना हाथ हटा लिया. अमायरा ने मेरा हाथ पकड़ा और फिर से अपनी पैंटी से छुआ दिया. अब हम दोनों को ही यह अच्छा लगने लगा. फिर अमायरा ने भी अपना हाथ मेरी पैंटी से छुआया. अब हम तीनो एक गोला बनाकर आमने सामने बैठ गई. मेरा एक हाथ हाथ सबनम की पैंटी को तो दूसरा अमायरा की पैंटी को छु रहा था. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

इसी तरह से सबनम और अमायरा के हाथ एक उन दोनों के दूसरे की पैंटी को और मेरे पैंटी को छु रहे थे. अचानक सबनम ने हम तीनों को ही पैंटी के अन्दर हाथ डालने को कहा. अब हम तीनो एक दूसरे के गुप्तांग को अपनी अपनी उंगलीयों से सहलाने लगी.

यह हमें इतना अच्छा लगा कि इसे हम लगातार करने लगी. कुछ ही देर के बाद हम तीनों की ही पैंटीयाँ गीली हो गई. नीचे एक घंटे तक नाच गाना चलता रहा और ऊपर हमने खूब मजे कर लिए. रात को एक बार फिर हम तीनों साथ थी. आज रात बहुत स्पेशल हो गई थी. आज हम तीनों ने ही अपने सारे कपडे उतार लिए थे. हम एक दूसरे से लिपटी जा रही थी और एक दूसरे के गुप्तांग का हाथों से मसाज किये जा रही थी.

सबनम ने अमायरा को पलंग पर सीधा लिटाया और उसकी टाँगे फैलाकर कूद उसके ऊपर सो गई और उसने अपने गुप्तांग वाले हिस्से को अमायरा के गुप्तांग से टच करा दिया. अमायरा के मुंह से एक आह और सिसकी निकल गई. मुझे यह देखना बहुत अच्छा लगा. इसके बाद हम तीनों ने ही इसे एक दूजे के साथ दोहराया. हम तीनों इसी तरह से सवेरे चार बजे तक खेलते रहे. इसके बाद हम जब पूरा थक गए तो सो गए.

अगले दिन निकाह था और वो रात हम तीनो की एक साथ आखिरी रात. निकाह होते होते और खाना खाते कहते रात के दो बज गए, मेरी और सबनम कि ट्रेन सवेरे आठ बजे की थी. हमने फैसला किया कि हम तीनो बिलकुल नहीं सोयेंगे. हम कमरे में आ गई. इसके बाद वो ही खेल शुरू हो गया. लगातार यह खेल चला और सात बजे मैं और सबनम बिहार स्टेशन आ गई.

अमायरा हमें छोड़ने स्टेशन आई. उसकी आँखें नम थी. हम दोनों भी बहुत उदास हो गई थी. अमायरा ने मुझे और सबनम को अकेलेपन से निपटने का एक अच्छा और बहुत ही सुहावना उपाय बतला दिया था.

मुंबई आने के बाद अमायरा कि बहुत याद आती. हम दोनों लेकिन आपस में यह सब दोहराने लगी. रात होते ही हम दोनों एक हो जाती. एक दिन हम दोनों ही हमारे कमरे में कोई फिल्म देख रही थी. हमारे कमरे का दरवाजा खुला था. हमें इस बात का बिलकुल ही अहसास नहीं रहा. फिल्म इंग्लिश थी इसलिए उसमे कई सेक्सी दृश्य भी आते जा रहे थे.

जब भी कोई ऐसा दृश्य आता हम दोनों एक दूसरे से लिपट जाती और आपस में किस कर देती. अचानक ऐसा ही एक लम्बा दृश्य आ गया. सबनम ने उतीजना में खुद के और मेरे सारे कपडे उतार दिए. हम दोनों पूरी तरह से नग्न हो गई. सबनम मेरे ऊपर चढ़ गई और अपने गुप्तांग को मेरे गुप्तांग से रगड़ने लगी.

मैं भी उसे इसी तरह से जवाब देने लगी. तभी माला शायद पानी पीने के लिए किचन की तरफ गई. वापस लौटते वक्त उसने हमारेकमरे कि लाईट जलते देखी तो वो हमारे कमरे की तरफ आ गई. दरवाजा खुला देखा तो भीतर आ गई. भीतर आते ही उसने जब हम दोनों को इस हालत में देखा तो उसके मुंह से एक हलकी सी चीख निकल गई. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

हम दोनों चौंक गई. हम दोनों ने माला को देखा तो डर के कारण आपस में और भी लिपट गई. माला को अचानक से ये दृश्य बहुत ही उत्तेजना वाला लगने लगा. उसने मुस्कुराते हुए हमें देखा और हमारी तरफ हाथ हिलाती हुई अपने कमरे में चली गई.

अगले दो तीन दिनों तक हम माला ने नजर नहीं मिला सके. लेकिन माला हमें हमेशा एक कटीली मुस्कराहट के साथ देखती. हम दोनों अब माला से अक्सर नजरें बचाने की कोशिश करते. एक दिन रात को मैं सबनम बिस्तर में थे. हम दोनों एक दूजे से लिपटे ही थे कि कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया.

माला के अलावा कोई और नहीं हो सकता था. सबनम ने एक चद्दर अपने ऊपर डाली और दरवाजा खोला. माला ही थी. उसने स्पोर्ट्स ब्रा और हॉट शोर्ट पहन रखा था. उसने सबनम से कहा ” आज मैं अकेली ही हूँ. वे दो दिन के लिए टूर पर गए हैं. मुझे अकेले सोते हुए डर लग रहा है.

क्या मैं आज की रात तुम लोगों के कमरे में सो सकती हूँ? तुम दोनों जो भी करती हो मुझे उसमे कोई आपत्तिजनक नहीं लग रहा. हर किसी को अपने हिसाब से जीने की आज़ादी है. तुम आज भी रात को अपने हिसाब से सो सकती हो. ” सबनम ने उसे अन्दर आने दिया. हमारा डबल बेड काफी चौड़ा था. माला उसी पलंग पर एक तरफ लेट गई. सबनम वापस आकर मेरे साथ मेरी चद्दर में मुझसे लिपटकर सो गई.

हम दोनों हमेशा नाईट लेम्प जलाकर ही सोती हैं. माला हम दोनों को देखने लगी. मैंने सबनम को और सबनम ने मुझे चूमना शुरू किया.थोड़ी थोड़ी देर के बाद हम दोनों उस बिस्तर पर आपस में लिपटी हुई ऊपर नीचे भी हो जाती. माला को नींद नहीं आ रही थी. उसकी जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी.

उसने अचानक हम दोनों से कहा ” अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो तुम दोनों चद्दर निकालकर भी यह सब कर सकती हो. ना जाने क्यूँ मुझे ये देखना अच्छा लग रहा है. मेरी बात मान लो प्लीज.” मैंने सबनम की तरफ देखा. सबनम ने एक इशारा किया और हम दोनों ने चद्दर को उछाल दिया.

अब हम दोनों के अर्धनग्न जिस्म माला के सामने थे. हमने केवल ब्रा और पैंटी पहन रखी थी. हम दोनों आपस में लिपटी हुई थी. कभी मैं सबनम के उपर लेटती और कभी सबनम मुझ पर. कभी एक दूसरे के अलग अलग हिस्सों को चूमते हुए हम दोनों अपने होंठ आपस में बहुत जोर से आवाज करते हुए मिला लेते माला को यह सब देखते हुए बहुत मजा आने लगा था.

कभी कभी वो तकिये को अपनी बाहों में दबा लेती. कभी वो तकिये को अपनी दोनों टांगों में दबा लेती. सबनम ने यह देखा तो उससे रहा नहीं गया. उसने मुझे इशारा किया और वो माला के करीब चली गई. सबनम ने माला से कहा ” आप को अगर हमें इस तरह से देखने में कोई आपत्ति नहीं है तो हमें भी आपको हमारे साथ शामिल होने में आपत्ति नहीं है.”

माला का चेहरा खिल उठा. वो हम दोनों के साथ आने के लिए तैयार हो गई. सबनम ने उसकी स्पोर्ट्स ब्रा को खोल दिया. माला ने स्वयं अपने हॉट शोर्ट को उतार दिया. मैंने और सबनम ने माला को अपनी बाहों में ले लिया. सबनम और मैं माला को जगह जगह चूमने लगी. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

माला भी पूरे जोश के साथ इसमें शामिल हो गई. कुछ देर के बाद हम तीनों ने अपने सारे कपडे खोल दिए थे. अब सबनम और मैंने अपने अपने जननांग माला के जननांग से कई बार स्पर्श किये और धीरे धीरे आपस में रगड़े भी. माला को बहुत ही मजा आया.

कुछ ही देर के बाद माला भी हम दोनों की तरह एक लेस्बियन बन चुकी थी. अब जब भी माला घर में अकेली होती है तो वो या तो हम दोनों के साथ या कभी हम्मे से किसी के साथ हमबिस्तर हो जाती है. हम तीनों कि जिंदगी बहुत अच्छे से गुजर रही है.

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