लंड की प्यासी बीवी

घर वालों को किस तरह मैंने 3D में शोले देखने के बहाने बाहर भेज दिया, और तब घर में मैं और मेरी पत्नी सोनम दोनों अकेले थे. मैंने उसे उस दिन और अपनी जिंदगी में पहली बार बाथरूम में शावर के नीचे पेला. दूसरी बार ड्राइंगरूम की टेबल पर और तीसरी बार किचन में. मैगी बनाते समय.

मैगी तो लंड को गांड के मजे देने के चक्कर में जल गई. फिर सोनम(मेरी बीवी) ने मैगी दूबारा बनाई. नंगे हम दोनों डायनिंग टेबल पर कुर्सी पर मैं उसे अपनी गोद में बैठाकर उसके हाथों से मैगी खाई. गोद मैं बैठने के कारण मैगी बाद में खत्म होती. लडं पहले खड़ा होने लगा.

लंड तो चोदने की ट्रेन बना चूका था

जब सोनम को ये एहसास हुआ कि मेरा लंड चौथी बार उसे चोदने के लिए खड़ा हो रहा है. तो वह मेरे ऊपर थोड़ा और खिसक कर बैठ गई. यानि जाँघ मेरी जाँघों पर, गांड पूरी बाहर दूसरी साइड को.

उसने एक पैर थोड़ा दूर किया. मेरा हल्का हल्का खड़ा हो रहा लंड पकड़ा और धीरे धीरे खीचने, और सहलाने लगी.

मैंने पुछा – “चौथी बार चूदने के लिए तैयार है??”

सोनम – “अब तक हमने लगातार कितनी बार पेलम-पेल की है.”(मेरा लंड थोड़ा कसकर दबाकर खिंचते हुए)

मैं – “5 या 6 बार सुहागरात वाली रात”

सोनम – तो आज दहाई का आकाड़ा पार करते है.(दूसरे हाथ अपना चूचा दबाते और मसलते हुए)

मैं – पागल है, चौथी बार चोदमें में ही निकलने में अभी 25 मिनट से ऊपर लग गया.

मैं बक – बक कर ही रहा था. कि सोनम – तुम बक – बक बहुत करते हो. इतना कहते ही उसने मेरा लंड छोड़ मेरी मुंडी पकड़ी और अपने चूचों को मेरे मुंह में घुसेड़ दिया. मैंने दूसरे चुचे को हाथ में पकड़ा और निप्पल खिंचने लगा.

अब भी मेरा एक हाथ खाली था. उसने मेरा वह हाथ धीरे से अपनी चूत की और ले गई और मेरी एक उँगली को अपनी चूत में घुसाने लगी.

गांड आधा घंटा चूदने के बाद चूत मस्ती में फूल चूकी थी. और चूदने को तैयार बैठी थी.

फिर वह धीरे से उठी और बालकनी की और चली गई. हमारी बालकनी काफी लंबी चौड़ी और बड़ी है. दिन में वहाँ ठीक-ठाक धूप भी आती है. ठीक-ठाक इसलिए क्योंकी बालकनी के ऊपर – नीचे, दाएँ-बाएं, आगे-पीछे सब तरफ ग्लास लगवा रखा है. है तो यह वैसे चोरों से सुरक्षा के लिए पर इसका एक फायदा यह भी है कि बाहर का कोई आदमी बालकनी में झाँककर या किसी भी हालत में नहीं देख सकता की क्या हो रहा है.

वह बालकनी में निकल कर गई. गोल चेयर पर अपना घुँटना रख कर मुझे पीछे से चोदने का ईशारा करने लगी. मैं जब बालकनी में गया तो देखा की मेरे दाएँ वाली बालकनी में एक परिवार बैठकर चाय पी रहा था. और दायी तरफ वाली में कोई नहीं था.

एक दम पार्न फिल्मों वाली हालत थी. पर चिन्ता की कोई बात नहीं थी. मैंने धीरे से उसकी फूल कर मदमस्त हो चूकी चूत में लंड घुसाया और रेलम-पेल सुरू हो गई. चूत इतनी गीली थी कि उसमें से लसलसा सा चिकना पानी लगातार बह रहा था. और उसकी चूदने की खुशी बंद ही नहीं हो रही थी. पेलवाती हुई वह मुझे कभी इतनी हस्ती और मस्ती में कभी नहीं दिखी.

अचानक ही वह हट गई और मुझे उसी गोल चेयर पर बैठने को कहा, दुसरी साइड वाली बालकनी में भी पड़ोसी आ गए और धुप का मजा लेने लगे. सब बातचीत कर रहे थे इधर उधर देख रहे थे. उन सबके बीच हम जैसे चोदा-चोदी करते हुए गायब ही थे.

मेरे कुर्सी पर बैठते ही वह मेरे ऊपर से आकर मेरे लंड पर ऊपर नीचे चोदने लगी. मेरा लंड और अंडा उसकी गुलाबी चूत से निकलते पानी से तरबतर हो गई थी. मैंने उसे पकड़ा और गांड से पकड़ उसे  सपोर्ट करने लगा ताकी वह जल्दी थक न जाए. बीच-बीच में जब वह हल्का कुछ सेकेण्ड को रूकती और मेरे लंड के ऊपर बैठती तो मेरा लंड उसकी चूत में और मोटा होने और फूलने लगता. और उसकी चूत मेरे लंड को दबाती. ये सेकेण्ड ऐसे होते है कि इन्हें बरदास्त कर पाना बड़ा मुश्किल होता है, मैं इसके लिए उसके चूचों को अपने मुंह में भर लेता. और मन से चूसता, निप्पल को दाँतों से हल्के से काँटता और वह कभी कभी इससे इतनी मस्त हो जाती की अपने नाखुन से मेरे हाथों या पीठ पर हल्का सा खरोच मार जाती. उस वक्त तो उनका पता भी न चलता.

कुछ देर बाद वह उलट कर सेक्स करने लगी. अब वह कभी आगे पीछे अभी ऊपर नीचे और कभी कभी मेरा सबसे पसंदीदा गोल-गोल घुमने लगती. गोल गोल में मैं बिलकुल पागल सा होने लगता हूं. इस बार तो उसने इतनी देर तक किया कि मैं अपना आपा ही खो बैठा. उसे हटा गोद में उठा कर बालकनी के ही सोफे पर कुर्सी पर बैठने जैसे पोज में खड़ा किया, और खुद सोफे पर आधा लेट अपनी गांड और कमर सोफे के बाहर की और धकाधक रेलने लगा. इस पोज में मैं किसी पार्नस्टार के जैसे फूल स्पीड में पेलता हूँ. वह भी इतना की वह मस्त हो हर बार कुछ ही देर में मेरे ऊपर गिर जाती थी. और इस बार भी ऐसा ही हुआ. वह मेरे ऊपर लेट गई.

सोनम की चूत लाल कर डाली

लेटने पर मैं उसका वज़न नहीं संभाल पाया और उसे लेकर सोफे पर उसके ऊपर चढ़ गया और शुद्ध देशी स्टाइल में एक बार फिर चोदने लगा. उसने अपनी एक टाँग सोफे के सिरहाने के ऊपर की. दोनों हाथों से हम-दोंनो ने एक दूसरे को कसकर जकड़ा और अब फटाफट के बजाए आराम-आराम से सेक्स का मजा लेने लगे. सोनम धीरे धीरे मुझे और मैं धीरे धीरे उसे गले. कंधे, और गले से चाटते चूमते एक दूसरे पर थूक लगाते गिराते. जीभ में जीभ फँसा ली. और हल्की धूप में चोदम – पट्टी अगले कई मिनट तक करते रहे. जब मैं इसमें थोड़ा स्लो पड़ गया तो उलटी मार कर वह मेरे ऊपर हो गई. इस पोज में वह अपनी गांड ऊपर नीचे कर बड़े अच्छे से सेक्स कर लेती है. हम दोनों के मुंह एक दूसरे के थूक से और चूत – लंड चिकने पानी से सराबोर थे. स्लो सेक्स का मजा हम दोनों ने पहले कभी इतने अच्छे से नहीं लिया था. हम दोनों को ही लग गया था की अब हम दोनों ही झड़ने वाले है. पर मैंने उससे कहा क्यों ने मैं तेरी चाट के निकालूँ और तू मेरी चूस के. उसने बीना कुछ कहे. मुड़कर चूत तरफ कर दी. मैंने उसकी दोनों जाँघों के बीच अपना गाल सटाया और होठों को चूत से सटा जीभ अंदर घुसा दी उसने भी मेरा लंड मुंह में ले उसे दोनों हाथों से मसल-मसल कर खिंचने लगी. हम दोनों ने पहले कभी यह पोज पहले नहीं आजमाया था. और ना ही मैंने इससे पहले कभी उसके स्पर्म का स्वाद चखा था. हालाँकी मैं उसके मुंह में कई बार झड़ा हूं.

मैं यह सब सोच ही रहा था कि मुंह अपने मुंह में कुछ गांढ़ा जेल सा महसुस हुआ. मैंने उसे तुरंत थूक दिया. वह कुछ देर के लिए शांत हो गई. पर तय नियम के मुताबिक उसे मेरा चूस कर निकालना ही था कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया पर इस बार उसके मुंह में नहीं.

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