शीला की गुलाबी चूत

शीला के घऱ में कुल मिलाकर तीन लोग थे. उसका पति, श्वसुर और वह स्वयं. इसीलिए जब भी पति पत्नी घर में कहीं भी सेक्स करते तो श्वसुर भागलदास किसी खिड़की या कोने से देखकर ही काम चला लेते. जब मैंने ये बात शीला को बताई तो उसकी आँखें फटी रह गई. और उसने श्वसुर को चार गालियाँ भी दे दी.

मैं, “यार दो बार चोद चूका हूँ, भूख लगी है.”

शीला, “मेरी गुलाबी चूत का सफेद अमृत पीएगा, जिंदगी भर इसके अलावा और कुछ नहीं माँगेगा.” यह कहते हुए उसने मुझे कुछ पनीर दिया और डायनिंग टेबल पर मेरे सामने मेरी कुर्सी के दोनों तरफ पैर लटकाकर बैठ गई.

मैंने एक दो टुकड़े ही खाए थे कि उसने कहा.

शीला, “दिखा की तू कितना बड़ा हरामी है.”

मैं, “मतलब.”

शीला, “मतलब सेक्स के मामले में तू क्या कुछ कर सकता है. जैसे मैं तेरा सारा सफेदा पी गई वैसे क्या तुझमें कुछ करने की हिम्मत है.”

मैं, “क्या करके दिखाऊं, बोल.”

शीला, “मैं क्या बोलू तू खुद करके दिखा कुछ भी.”

मैंने कुछ सेकेण्ड सोचा और एक पनीर का टुकड़ा उठाया और उसकी गुलाबी चूत के बाहरी हिस्से पर ऊपर से ही रगड़ कर खा लिया.

गुलाबी चूत पे पनीर लगा के खाया

(मेरे कंधे पर हाथ रख अंगुठे से गर्दन को प्यार से सहलाते हुए) शीला, “इससे भी ज्यादा.” मैंने दाएँ हाथ से उसकी गुलाबी चूत को खोला एक पनीर का टुकड़ा लिया अंदर वाले नम गिली जगह पर रगड़ पूरा लगाया. और उसे भी खा गया. हम दोनों हल्के से हँसने लगे. शीला, “मान गई तुझे, सिद्धार्थ को जब भी ऐसा कुछ करने को कहती हूँ वो मुंह बनाकर दूसरी ओर चल देता है, वो सिर्फ जानवरों की तरह लंड डालेगा बीस मिनट चोदेगा फिर काम खत्म.”

उसने ये सब कहते हुए खिसककर टेबल के किनारे पर आ गई और पनीर का आखिरी बचा छोटा सा टुकड़ा गुलाबी चूत में पूरा डाल लिया और बोली, “मुंह से.”

मैंने उसके पैर अपनी दोनों जाँघों पर रखवाएं घुटनों को एक दूसरे के उल्टा 180 अंश पर फैला दिया. गुलाबी चूत में अटका पनीर हल्का सा दिख रहा था. मैंने अपनी जीभ नीचे लगाई और चाटते हुए अंदर एक बार जोर से थूका. और मैंने अपना मुंह पूरा उसकी मदमस्त हो उठी नम, गिली, गुलाबी चूत में डाल जैसे कोई चौमिंन को सुरकता है वैसे ही सूरका. पनीर सटाक से मेरे मुंह में आ गया. पनीर निगल मैं गुलाबी चूत चाटने में लग गया. पिछले एक घंटे में दो बार चूदने के कारण उसकी गुलाबी चूत काफी खुल गई थी. और गुलाबी चूत पर हल्की सी सेक्स वाली सुजन यानी उठाव साफ देखा जा सकता था. वह इतनी जोर-जोर से साँसे ले रही थी मुझे बड़े आराम से सुनाई दे रही थी. मेरा लंड पूरा खड़ा और कड़ा हो गया था. और उसमें से गिला पूर्व-रसाव बाहर निकल रहा था.

मैं वापस हट बोला, “अब बर्दास्त नहीं हो रहा.”

शीला, “बर्दास्त करने की जरूरत क्या है.” इतना कहते ही वह टेबल से आगे खिसककर मेरे लंड को पकड़ अपनी गुलाबी चूत में घूसा लिया. और ऊपर निचे करने लगी. उसके चूचे जोर से हिल रहे थे. और उनसे चप-चप सी आवाज आ रही थी. गुलाबी चूत और गोरा लंड दोनों मस्ती से मदमस्त होने लगे रिसाव इतना तेज था कि चोदने की आवाज जोरों से आने लगी. मैं उसके दोनों चूचों को पकड़ कसकर दबाने और मसलने लगा. कई मिनट जब ऐसे ही बीते तो लंड की मोटाई और लंबाई तो नहीं बदली पर थोड़ा ढ़ीला पड़ गया. मस्त हो उसने अपना बायाँ चूचा मेरे मुंह में डाल दिया और अब ऊपर नीचे करने के बजाए आगे पीछे कर चोदने लगी. जब लंड थोड़ा ढीला हो इस तरह चोदने में बड़ा मजा आता है. उसने अपने ओठ दाँतों दबा लिए, मेरी आँखें बंद हो गई. और मैं अब किसी दूसरी ही दुनिया में पहुँच गया था.

बड़ी चुदक्कड़ हैं शिला

शीला ने अपने पूरे बाल मेरे ऊपर बिखेर दिए, अब मुझे उसके चूचे के सिवा कुछ नहीं दिख रहा. ऐसे कुछ सेकेण्ड बितने पर मैं उसकी गुलाबी चूत से लंड निकाले बिना उसे गोद में ले खड़ा हो गया.

शीला, “स्टैंड एण्ड डिलिवर सेकस पोज करने का दम है?.”

मैं, “इसमें दोनों को एक दूसरे का सपोर्ट करना पड़ता है. कर पाएगी.” उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा अपना थोड़ा वज़न मेरे कंधो पर डाला, पैर मेरी कमर पर ले थोड़ा दोनों जाँघ उठाई और स्टैंड एण्ड डिलिवर सेक्स पोज में पेलम-पेल शुरू हो गई. गोरा लंड अंदर गुलाबी चूत में डालने को उसे नीचे करता और बाहर करने को उठाता, उठाते समय वो हाथ से ऊपर उठने की कोशिश करती. यानी पूरा सपोर्ट. हम दोनों ही पहली बार इस पोज में सेक्स कर रहा था. हम दोनों ही कुछ मिनट बाद थकने लगे. और मैंने उसे टेबल पर लिटा दोनों टांगे क्रास में कर मरमेड सेक्स पोज में लंड गुलाबी चूत के मजे लुटने लगा. हम दोनों ने आँखें बंद कर ली. आँखें बंद करने के बाद ही अब मुझे बस शीला की ऊंह. ऊंह और चूदने की भच-भच की आवाज सुनाई दे रही थी. थोड़ी देर बाद जब मैं खड़े-खड़े थकने लगा और उसका जोश वापस आने लगा तो उसने मुझे फिर से कुर्सी पर बैठने को कहा, और मेरी और पीठ कर डेस्क डिटेल सेक्स पोज में बैठ लंड को धीरे-धीरे अपनी गांड में डालने लगी. लंड चूत की नमी से पहले से ही गिला था और गांड में 1 घंटे पहले लगाया तेल अब भी थोड़ा बहुत था तो काम बन गया. हालांकि पिछले 1 घंटे में मैं उसकी गांड दूसरी बार चोद रहा था पर कोई खास अंतर नहीं था. उतना ही मजा दुबारा आने लगा. मैं उसे कमर से पकड़ थोड़ा सहारा भी दे रहा था. किसी भी सेक्स का मजा तभी सबसे ज्यादा आता है जब दोनों साथी एक दूसरे के आनंद का ख्याल करें. और ये बात शीला बखूबी समझती थी और उसका पालन भी करती थी. जैसे ही किसी नए पोज सेक्स करते हुए में कुछ सेकेण्ड बीतते मस्ती और आनंद में हम दोनों की आँखे बंद हो जाती. पर तालमेल बिलकुल नहीं बिगड़ता. थोड़ी देर बाद हम दोनों जमीन पर बैठ गए पैर एक दूसरे के पीछे ले क्रास में ले धीरे-धीरे पेलम-पेल करने का मजा लेने लगे. उसने मुझे अपने सीने से सटा लिया मेरे ओठों में अपने ओंठ चिपका हम जीभ एक दूसरे के मुंह में डाल बड़े आराम से धीरे-धीरे सेक्स करने का मजा लेने लगे. इस पोज में धीरे-धीरे आराम से सेक्स का मजा मैं पहली बार ले रहा था. सब कुछ शांत सा था. लंड तो बिलकुल मदमस्त हो चूका था. और उसकी गुलाबी चूत भी मस्ती में काफी फूल गई थी. अब हम दोनों को सेक्स करते हुए कुल 1 घंटा और इस पोज में 20 से भी ज्यादा मिनट हो गए पर मजा बढ़ता जा रहा था. और अब हम दोनों ही कभी भी झड़ सकते थे. मैंने सोचा कुछ भी हो अबकी मैं इस स्लो-सेक्स आ आखिरी पल तक मजा लूंगा. काफी देर बाद मैं उसकी गुलाबी चूत में अंदर झड़ गया और उसके कुछ ही सेकेण्ड बाद वो भी…

रात से भोर हो चूकी थी. मैंने उसे कहा मुझे अपने घर जाना है. तो उसने कहा कि एक दो घंटे बाद जाना.

बिस्तर पर लौट एक दूसरे से नंगे ही चिपके हम काफी देर तक बात करते रहे. उसने बताया कि उसका पति अगले कई महीनों तक बाहर ही रहेगा.

और गांड में अपना कोई नमी या रस नहीं होता इसलिए बाहर तेल या क्रीम या कोई चिकनी चीज लगा लेनी चाहिए ये शिक्षा शीला को उसकी माँ ने ही दी थी.

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