बेटे के दोस्त का लंड खाया तो उईई माँ ….उईईईई माँ करके मैं चिल्लाने लगी

मैं अनारकली आप सभी का कामुक स्टोरी डॉट कॉम पर दिल से स्वागत करती हूँ. मेरी ये पहली कहानी है. हर रात मैं यहाँ की मस्त मस्त कहानी जरुर पढ़ती हूँ. उसके बाद ही मुझे नींद आती है. मेरी उम्र ३३ साल है. कद ५ फुट ८ इंच है. मेरे बॉडी का फिगर ३६ ३० ३६ है. मेरे मोहल्ले के जवान लडके मुझे चोदना चाहते है. मुझे एक नजर देखने के लिए वो सारा दिन दरवाजे के सामने ही खड़े रहते है. उस दिन मेरे लडके दिनेश का दोस्त रंजीत मेरे घर आया था. वो बहुत ही हैंडसम २२ साल का लकड़ा था.

नमस्ते आंटी!! आप किसी है??” रंजीत बोला.

मेरी नजरें उस पर ठहर गयी. उसका मस्त बोडी शोडी थी. हाथ के बल्ले उसकी टी शर्ट से दूर से ही दिख रहे थे. सीने के ६ पैक एब्स भी टी शर्ट से दिख रहे थे. रंजीत ने काली जींस पहन रखी थी जो जगह जगह से फटी हुई थी.

‘अरे बेटा !! तेरी जींस कैसे फटी???’ मैंने पूछा

‘आंटी ! ये फटी नही है. इस तरह का तो आज कल फैशन चल रहा है!’ रंजीत बोला

मेरी नजर उसकी जींस की जिब पर पड़ी. बड़ी सी जिब थी. मुझे रंजीत जैसे हैंडसम लड़का का लंड दूर से ही दिखने लगा. मैंने उसके लिए चाय बना कर ले आई. मेरा बेटा दिनेश कही गया था. इसलिए मैंने रंजीत को वेट करने को कह दिया. पर काफी देर बाद भी दिनेश नही लौटा. रंजीत चाय पीकर सोफे से उठ गया. ‘आंटी!! मैं चल रहा हूँ. दिनेश से कह देना की मैं कल आऊंगा!!’ रंजीत बोला और चला गया. मैं उसको छोड़ने दरवाजे तक गयी. उसने हनी सिंह जैसे बाल कटवा रखे थे. रंजीत के जाने के बाद मैं सिर्फ उसी के बारे में सोचती रही. काश उसका लंड खाने को मिल जाए तो कितना मजा आए. मैं चाह कर भी रंजीत को भूल नही पा रही थी. बार बार उसका कन्धों के बल्ले, उसके ६ पैक एब्स मेरी नजरों के सामने आ रहे थे. उस रात मैंने रंजीत को सोचते हुए ही मुठ मार दी. ‘काश अगर वो मुझ जैसी अधेढ़ औरत को चोदे तो कितना मजा मिले. दोस्तों, मैं अनारकलि आप लोगों को बताना ही भूल गयी की मेरे पति १० साल पहले एक कार एक्सीडेंट में मर गये थे. इसी वजह से मैं विधवा हो गयी.

पर दोस्तों आज भी मेरा मन करता था की कोई जवान लड़का मुझे कसके जी भरके चोदे. मैंने अपने बेटे दिनेश के मोबाइल से चुपके से रंजीत का नंबर निकाल लिया. मैंने आई यू के कई मेसेज रंजीत को भेज दिए और बता भी दिया की मैं दिनेश की माँ बोल रही हूँ. जिससे उसे कोई शक सुबह ना हो. अगले दिन रंजीत फिर से मेरे घर आया. आज भी मेरा बेटा दिनेश किसी काम से बाहर गया हुआ था. मैंने रंजीत को बैठने को कहा. वो मुलायम गुलगुले सोफे पर बैठ गया. मैंने उसे आँख मारी और इशारा किया. जवाब में उसने भी आँख मार दी. मैं उसके पास ही सोफे पर बैठ गयी. रंजीत मुझे देखते हुए चाय पीने लगा. मैं भी उसे आँखों में आँखें डालकर देखने लगी और चाय पीने लगी. चाय पीकर उसने कप टेबल पर रख दिया और मेरे करीब खिसक आया. रंजीत मुझे चोदना चाहता था. मैं ये बात अच्छी तरह से जान गयी थी.

उसकी आँखें बता रही थी की वो मुझे पसंद करता है. फिर रंजीत से मेरे पैर मेरी जाघ पर हाथ रख दिया. मैं फिरोजी रंग की मैक्सी पहनी हुई थी. क्यूंकि पति के मरने के बाद मुझे कोई रोकने टोकने वाला नही था. इसलिए घर में मैं अपने बेटे दिनेश के सामने सिर्फ मैक्सी में ही रहती थी. जैसे ही रंजित जैसे बांके छोरे से मेरी गोरी जांघ पर हाथ रखा मैं सिसक गयी.

‘क्यों आंटी ! कल रात में तो बड़ा आई लव यू!! आई लव यू!! कर रही थी. अब बताओ चूत वूत दोगी क्या???” हैंडसम छोरा रंजीत बोला.

‘बेटे!! अगर तुम मुझे अपनी माल समझ के मुझे प्यार करोगे तो मैं तुमको अपनी चूत जरुर दूंगी!’ मैंने कहा.

‘तो ठीक है आंटी! आज से तुम मेरी माल हो!’ रंजीत बोला और जहाँ उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा था सहलाने लगा. फिर आगे कुछ कहने की जरुरत नही थी. हम दोनों गले लग गये. बड़ी देर तक रंजीत ने मुझे अपनी बाहों में भरे रखा. उसके हाथ कब मैक्सी पर मेरे मम्मो पर आ गए मैं जान ही नही पायी. जब मेरी आँखें खुली रंजीत मेरे ओंठ पी रहा था. फिर वो जोर जोर से मैक्सी के उपर से ही मेरे दूध दबाने लगा. ‘रंजीत! चोद दे बेटा मुझे!! शायद तू नही जानता है की पुरे १० साल से एक बार भी मैंने लंड नही खाया है….’ मैंने उससे कहा. ये सुनकर रंजीत बड़ी जोश में आ गया. उसने मुझे सोफे पर ही लिटा दिया और मेरे होंठ पीने लगा. हमदोनो की सासें बड़ी तेज तेज चलने लगी. हम दोनों की आँखें बंद हो गयी. मेरे बेटे दिनेश का दोस्त रंजीत जोर जोर से मेरे ओंठ पी रहा था. मैं भी इधर मुँह चला रही थी और रंजीत भी उधर मुँह चला चलाकर मेरे गुलाबी ओंठ पी रहा था.

उसकी सासों को मैं सूंघ रही थी. रंजीत जैसे बाके छोरे की सांसों की खुसबू मैं महसूस कर सकती थी. रंजीत ने मेरे मम्मो पर हाथ रख दिए और जोर जोर से दाबने लगा. मैं मचलने लगी. रंजीत मैक्सी के उपर से ही मेरा बड़े बड़े कबूतर दबाने लगा. मैं आज ब्रा नही पहनी. क्यूंकि दिनेश के पापा के मरने के बाद मेरे रूप, मेरे यौवन को देखने वाला कोई नही था. इसी वजह से मैंने ब्रा और पेंटी पहनना बंद कर दिया था. रंजीत मेरे गोरे गोरे गाल और मेरे चेहरे पर फ़िदा था. उसने बड़ी जल्दी से मेरी मैक्सी निकाल दी. मैं बिलकुल नंगी हो गयी क्यूंकि मैं अंदर कुछ नही पहने थी. रंजीत ने फिर से मुझे सोफे पर धराशाही कर दिया. मेरे उपर वो चढ़ गया और मेरे मम्मे पीने लगा. दोस्तों, मेरे दूध बहुत बड़े बड़े थे. मेरे पति जब जिन्दा थे तो रोज रात में मेरी चूत लिया करते थे. इस वजह से मेरी छातियाँ बहुत ही बड़ी और विशाल हो गयी थी. मेरी दूध से खूबसूरत छातियाँ निचे की ओर लटक गयी थी. मैंने देखा रंजीत अपनी जीभ निकाल कर मेरी शहद सी मीठी छातियाँ चाट रहा था और पी रहा था.

‘आंटी !! यू आर सो ब्यूटीफुल!!’ रंजीत बार बार कह रहा था. फिर उसने अपने सारे कपडे निकाल दिए. उसका जिस्म बहुत ही खूबसूरत था. वो लड़का सिर्फ २२ साल का था. आप अंदाजा लगा सकता है की २२ साल में कोई लड़का कितना जवान होता है. मैं तो बार बार रंजीत का लंड ही देख रही थी. ८ इंच का मोटा लम्बा सा लंड था उसका. रंजीत मेरी छातियाँ मसल मसल के पी रहा था और दबा रहा था. दोस्तों, मुझे जन्नत जैसा सुख मिल रहा था. आज १० साल के लम्बे सूखे के बाद मैं चुदने वाली थी. वो लम्बा इंतजार, वो लम्बा सुखा आज खत्म होने वाला था. मैंने आँखें खोली तो देखा की रंजीत किसी छोटे बच्चे की तरह मेरी गोरी गोरी छातियाँ पी रहा था. फिर वो मेरे मखमली पेट को हर जगह चूमने लगा, चाटने लगा. फिर रंजीत मेरी गोलकर गहरी नाभि पर आ गया. मेरी नाभि बहुत ही सेक्सी थी. मेरे पति जब जिन्दा थे तो उन्होंने मेरी सेक्सी नाभि में एक सेक्सी रिंग पहना दी थी.

रंजीत अपनी जीभ मेरी सेक्सी नाभि में डालने लगा. मुझे गुदगुदी होने लगी. मैं मचलने लगी और हाथ पांव पटकने लगी. मेरी सेक्सी नाभि से हल्के हल्के रोयेदार बालों की कतार मेरी चूत तक जाती थी. रंजीत किसी रसिया की तरह मुझसे प्यार कर रहा था. वो मुझे अपनी बीबी की तरह प्यार कर रहा था. रंजीत उन रोयेदार बालों की कतार का पीछा करते हुए मेरी मखमली चूत पर पहुच गया. मैं सुबह ही अच्छे से अपनी चूत को शेव किया था. रंजीत से अपनी उँगलियाँ मेरी चूत पर रख दी तो मैं तडप गई. मैं सी सी सी उईइ माँ माँ करने लगी. दोस्तों, मेरी चूत बहुत ही जादा सुंदर और कमनीय थी. अब अपने मुँह अपनी क्या तारीफ़ करो. मेरे पति जब जिन्दा थे तो अपने पर्स में मेरी चूत की फोटो लेकर घूमते थे. जब भी मेरी याद आती थी चूत की फोटो देख के मुठ मार लिया करते थे.

इसके अलावा कुछ पड़ोसियों से भी जुगाड़ से मुझे चोद लिया था. उन सबको भी मेरी चूत बहुत हसीन लगी थी. वो भी मेरी चूत की फोटो पर्स में लेकर टहलते थे.

‘आंटी!! मैंने बहुत चूत देखी और चोदी है! पर तुम्हारी चूत बहुत हसीन है!’ रंजीत बोला. फिर वो झुककर चूत पीने लगा. आज एक असली मर्द की छुअन से मेरा रोम रोम खिल गया. किसी कमल के फुल की तरह मैं खिल गयी दोस्तों. मेरे बेटे दिनेश का दोस्त रंजीत ना जाने कहाँ से फरिस्ता बनकर मेरी जिन्दगी में आ गया था और मुझे चोदने जा रहा था. वो मेरी लाल लाल चूत की मखमली तहों को बड़े नाज और प्यार से हटा हटाकर मेरी चूत पीने लगा. मुझे जन्नत जैसा सुख मिलने लगा. कोई भी औरत हो अगर सम्भोग करने से पहले कोई मर्द उसका चूतपान करे तो उसे बहुत सुख मिलता है. ठीक मैं भी ऐसा महसूस कर रही थी. मेरी चूत में सनसनी मची हुई थी. प्यारा बेटा रंजीत मेरी चूत की तहों को प्यार और दुलार से उठा रहा था और सम्पूर्ण चूत को पी रहा था.

फिर रंजीत अपनी खुदरी जीभ के कोने से मेरी चूत के अंदर जीभ डालने लगा. मुझे ना जाने कैसा सबसे अलग सुखद अहसास हुआ. इसे शब्दों में बयां करना बड़ा मुस्किल है दोस्तों. रंजीत मेरे जिस्म के सबसे संवेदनशील हिस्से को पी रहा था. ये मेरी जिन्दगी का एक यादगार लम्हा था. फिर रंजीत बेटा मुझे चोदने लगा. मैंने अपनी टांगों को और फैला दिया जिससे रंजित मजे से और अच्छे से मुझे चोद पाए. उसने पूरी तरह से मुझे गर्म कर लिया था. तभी मुझे चोदना शुरू किया था. मैंने आँखें मूंद ली और सोचने लगी की जो होना है आज हो जाने दो. आज मैं दिनेश के दोस्त रंजीत को रोकूंगी नही. जितना देर तक उसका दिल करे मुझे पेलता खाता रहे. मैंने आँखें बंद कर ली. रंजीत खटाखट मुझे खाने लगा. मेरे सोने जैसे जिस्म को वो अच्छे से खा रहा था. मेरा पति मर चूका था. मैं विधवा थी.

पर आज भी अगर कोई मर्द मुझे बिना कपड़ों के देख लेता तो अपना लंड पकड़ लेता. मेरी त्वचा आज भी बेहद कसी और चिकनी थी. रंजीत मेरे जिस्म का पूरा मजा उठा रहा था. मेरी गदराई जाँघों को सहला सहलाकर वो मुझे चोद रहा था.

‘चोद !! अच्छे से बेटा मुझे चोद!! आज से तू मेरा राजा बेटा है! चोद बेटा कसके चोद!! मैं तरह तरह से बडबडाने लगी. इस वक़्त मैं इनती जादा गर्म हो चुकी थी की ३ ३ लंड खा सकती थी वो भी एक साथ. रंजीत मुझे फटाफट चोदने लगा. उसकी चुस्ती फुर्ती पर मैं मर मिटी. मैंने अपनी दोनों टाँगे तो हवा में उठा रखी थी रंजीत की चिकनी नंगी पीठ पर कसदी. इससे रंजीत बड़ा जोश में आ गया और गपागप मुझे पेलने चोदने लगा. इस दौरान उसने मुझे ५ ६ चांटे भी गाल पर जड़ दिए. फिर वो मेरी चूत में ही झड गया. मैं हपर हपर करके हाफ़ने लगी. कुछ देर बाद रंजीत से मुझे अपने लौड़े पर बिठा लिया. धीरे धीरे मैं उसके मोटे लंड पर उठने बैठने लगी. रंजीत बेटा अपने हाथ से मेरे आम सहलाने लगा. वो जोर जोर से मेरे रसीले आमों को दबा भी रहा था. मैं धीरे धीरे उसके लंड को अपनी चूत में लेकर उठाना बैठना शूरू किया. मेरी चूत में बड़ी नशीली रगड़ लगने लगी.

इस तरह से बैठकर चुदवाने में रंजीत बेटे का लंड पूरा का पूरा गप्प गप्प मेरी चूत में उतर जाता था और चूत की आखिरी दीवाल तक पहुच जाता था. दोस्तों, धीरे धीरे मैं रफ्तार पकडती चली गयी. जल्दी जल्दी उठ उठ कर चुदवाने लगी. मेरे गोल गोल दूध झटकों से उछलने लगे. जिससे रंजीत को बड़ा सुख मिला. वो जोर जोर से मेरे मलाई के गोलों को सहलाने और दबाने लगा. फिर तो मैंने तेज रफ्तार पकड़ ली. मैं बड़ी जल्दी जल्दी चुदने लगी. उधर रंजीत ने नीचे से अतिरिक्त धक्के देने शुरू कर दिए. इससे मेरी चूत बड़ी ही उत्तेजक रूप से चुदने लगी. रंजीत ने मेरे मलाई के गोलों में अपने नाख़ून गड़ा दिए जिससे मुझे दर्द होने लगा पर चुदाई के सुख में वो नही पता चला.कुछ देर बाद तो वो हुआ जिसकी उम्मीद नही थी. मैं आटोमेटिक किसी मशीन की तरह रंजीत बेटे के मोटे लंड पर जल्दी जल्दी उठने बैठने लगी और चुदने लगी.

वो नजारा देखने काबिल था. रंजीत बेटा मुझे बड़ी जोर जोर से फटर फटर करके चोदने लगा. मेरा पेडू जलने लगा और पेट ऐठने लगा. मेरी कमर खुद ब खुद नाचने लगी. लगा की मेरी कमर में कोई स्प्रिंग लगी हो. रंजीत मुझे चोदने लगा तो मेरी कमर गोल गोल नाचने लगी. मेरा ये स्प्रिंग वाला नजारा देखकर लड़का मस्त हो गया.  फिर रंजीत से कई जोर जोर के धक्के दिए और झड गया. मैं अब भी उनके लंड पर बैठी थी. हमदोनो ही थक चुके थे. चूर चूर हो चुके थे. क्यूंकि इस चुदाई में बहुत ताकत खर्च हुई थी. मैं अब भी रंजीत का लंड पर बैठी थी. उसके लंड का पानी मेरी चूत से सरककर नीचे आ गया था और बाहर बहने लगा था. मेरी गोल गोल रसभरी चुचियाँ इस ताबड़तोड़ चुदाई से बिलकुल तमतमा गयी थी. रंजीत बेटे ने मेरी पलंगतोड़ चुदाई की थी. फिर मैं रंजीत के लंड से नीचे उतर गयी. उसके लंड से ढेर सारा माल निकला जिसको मैंने दौडकर मुँह में भर लिया और मस्ती से रंजीत का लंड चूसने लगी.

दोस्तों आज मैं किसी असली रंडी जैसी चुद गयी थी. कहाँ मैं रंजीत से पुरे ११ साल बड़ी थी. पर उसने मुझे बड़े कायदे से चोदा था. उस लकड़े से सच में कमाल कर दिया था. मैं बड़ी देर तक रंजीत का लंड चूसती रही.

‘बेटा!! अब अगर तू मेरी गांड मार दे तो मेरा सृंगार पूरा हो जाए!!’ मैंने उससे कहा. रंजीत हसने लगा. फिर मैं कुतिया बन गयी और रंजित मेरी गांड मारने लगा. आज फिर से किसी ने १० साल बाद मेरी गांड मारी थी. रंजीत का लंड खूब मोटा खूब तगड़ा था. मुझे बहुत मौज आ रही थी. दोस्तों रंजीत से पुरे ३ घंटे तक मेरी गांड मारी और उसी में माल छोड़ दिया. उसने मेरी ऐसी खातिर की की मैं उससे पट गयी. अब वो हफ्ते में २ बार जरुर घर आता है और मेरी गांड और चूत दोनों मारता है. आपको ये कहानी कैसी लगी अपनी कमेंट्स कामुक स्टोरी डॉट कॉम पर लिखना न भूले. सभी पाठकों को धन्यवाद्!!

 

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5 comments

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